Saturday, June 4, 2011

                       अलवर महान

राजस्थान का सिंह द्वार, इसकी महिमा है अपार।
कहते हैं विरासत में मिला, निशानी है इसकी बाला किला।
पूरे भारत में नाम है इसका, क्योंकि यहां है अनमोल सरिस्का।
फेयरी क्वीन आती है लेकर, दूर-दूर से कई दर्शक।
कितना प्यारा आलम होता है, दृश्य है कितना मनमोहक।
समय की कीमत जो पहचाने, घंटाघर पर आकर जाने।
मछलियों का यह कहना है, कि सीलिसेढ़ में रहना है।
ठंड़ी-ठंड़ी चले बयार, यहां होता है नौका विहार।
ह्दृय है इसका होप सर्कस, पैर हैं इसके मूंगस्का,
एक हाथ है कटीघाटी और एक है हसन खां (हसन खां मेवाती नगर)
आता है जो एक बार, नहीं भूलता पुरजन विहार(कंपनी बाग),
पर्यटकों को देता संदेश, अलवर का यह सिटी पैलेस।
अलवर है कितना महान, है मेवात इसकी पहचान,
नई रोशनी नई उमंग, देती है जहूर की भपंग (प्रसिद्व भपंग वादक जहूर खां मेवाती अलवर से ही संबंध रखते हैं।)
अब ब्रिटेन हो या श्रीलंका, चारों तरफ इसी का डंका।
चाहे रूस हो या फिर मलाया, दुनिया भर में नाम कमाया।
अलवर में हमने जन्म लिया, यह सौभागय हमारा है,
राजस्थान की वसुंधरा पर अलवर सबसे न्यारा है।

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