Saturday, July 2, 2011

महिलाओं को समर्पित दो शब्द..

यह मेरे देश की नारी है, दस बीस पचास पे भारी है
ये कहने को तो प्यारी है, कहना अपनी लाचारी है
जिस पुरुष ने समझा नारी को अपने पैरों की जूती
समझो भाई समय से पहले किस्मत उसकी फूटी
क्योंकि जब-जब इस नारी ने मुंह खोला, तब-तब राज सिंहासन डोला
अब
शिक्षा की जब बात करें तो नारी आगे आए, पूरे साल वो ऐश कराके खुद की तकदीर बनाए।
बात करें जब राजनीति की तो नारी आगे आए, अपनी एक अदा से देखो कितने वोट जुटाए।
अपनी एक हंसी से देखो कितने घायल कर जाती है, एक पल में फिर शर्माकर वो सावित्री बन जाती है।
क्या तुमने इस नारी का चंडीका रूप भी देखा है, यह मूरत है केवल ममता की ये सिर्फ तुम्हारा धोखा है।
हमने इसको अंगुली पकड़ाई हाथ हमारा पकड़ लिया, फिर देखो इस देश को इसने अपने हाथों में जकड़ लिया।
मनोजए अलवर।

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